वीरो की धरती मेंवाड की हल्दीघाटी से 10 कीलामीटर उत्तर पश्चिम में एवं श्री नाथजी की पावन नगरी नाथद्धारा से 18 किलामीटर दक्षिण में कोशीवाडा गांव स्थित है। यह गा्रम पंचायत कोशीवाडा का मुख्य गांव है। गांव में मुख्य गांव सहित छोटी बडि भागले और ढाणियां है। रियासत काल मे यह मेवाड रियासत का एक गांव था एव मेवाड दरबार द्धारा इसे पुरोहित बाहाणो को माफिदारी में दे रखा था। पुरोहित इस गांव के ठाकुर और माफिदार कहलाते थे ।
राजस्थान में पंचायती राज्य की स्थापना के साथ यह गांव भी पंचायती राज का हिस्सा बन गया है एव इस गांव में भी पंचायत का गठन हो गया था।
गावं में पुरोहित,जैन,राजपुत,सुथार,लुहार,रेबारी,कुम्हार,नाई,दर्जी,तेली,भील एवं बलाई जा​ित के लोग रहते है जो मुख्य गांव एवं भागलो मे रहते है। गांव का विस्तार निम्नानुसार है -

1- मुख्य गॉंव
2- लुहारो की भागल
3- मोटी भागल
4- निचली सुथारो की भागल
5- हनुमानजी की भागल
6- रामर
7- डांग की घाटी
8- बल्लो कि भागल
9- गदाकडिया
10- झांझेला
11- आंजना
12- पेतलाया
13- गडा का रेंहट
14- सादुला
15- बाबरिया तलाई
16- रेबारियो की ढाणी
17- उपली सुथारो की भागल
18- चकतोडि

गांव में आवागमन के लिए पास के दोनो प्रमुख ाहरो नाथद्धारा एवं उदयपुर से डामरीक्रत रोड से जुडा हुआ है तथा दोनो ही ाहरो से समय समय पर प्राईवेट बसे आवागमन के लिए उपलब्ध है।
कृषि के द्रश्टिकाण से गांव में मुख्यत दो ही फसलो मक्का एव गेहु की पैदावार बहुतायत मे होती है इसके अलावा ग्वार,​ितल्ली,सरसो,मुंग,चमला,तारामीरा आदि अनाजो की पैदावार भी कही कही होती है। मसालो में प्याज एवं लहसुन की भी कही कही पैदावार की जाती है। पशुधन के रुप में मुख्य रुप से गाय,भैस एवं बकरी पाली जाती है इसके साथ साथ खेती के लिए कीसानो द्धारा बैल भी पाले जाते है।
पानी के द्रष्टिकोण से गांव की स्थिती कुछ विषेश अच्छी नही है। प्राय: पीने के पानी एवं सिंचाई का पानी दोनो का ही अभाव है। वर्तमान मे मुख्य गांव को बागेरी नाका परियोजना से जोडने के बाद पीने के पानी की समस्या का कुछ हद तक समाधान हुआ है। परन्तु सिंचाई के पानी के लिए न तो कोई बडा तालाब है और न ही कोई नहर। एक नहर है जो गांवगुडा तालाब से गांव के नागेला तालाब में आती है पर न तो वो नहर व्यवस्थित है और न ही उस तालाब की पर्याप्त भराव क्षमता है।
गांव मे शिक्षा के लिए माध्यमिक विद्यालय,प्राथमिक विद्यालयए,राजीव गांधी पाठशालाए,आंगनवाडी एवं एक प्राईवेट स्कुल भी है। स्वास्थ के लिए आयुर्वेदिक ‌‌‌औषधालय एवं उप स्वास्थ केन्द्र हैं।
गांव की 40 प्र​ितशत जनसंख्या व्यवसाय एवं रोजगार के लिए गांव को छोडकर शहरो मे चली गयी है इसमे में भी जैनीयो में 96 प्र​ितशत लोग बाहर है। बाहर जाने वाले शहर में बोम्बे सबसे बडा नाम है। शेष लोगो में जिविकोपार्जन के लिए क्रशि एवं मजदुरी प्रमुख साधन है। इनके अलाव कुछ जा​ित के लोग अपना पुस्तैनी या परम्परागत व्यवसाय भी करते है जैसे दर्जी,नाई,कुम्हार,सुथार एवं लुहार।
मनोरंजन के लिए गांव में गवरी,गैर नृत्य,गरबा,भजन मंडली आदि का आयोजन होता है तथा साथ ही टेलीविजन एवं मोबाइल का उपयोग बहुतायत में होने लगा है।