वीरो की धरती मेंवाड की हल्दीघाटी से 12 कीलोमीटर उत्तर ‌‌‌पश्चिम में एवं श्री नाथजी की पावन नगरी नाथद्धारा से 20 किलोमीटर दक्षिण में मोखाडा गांव स्थित है। ग्राम पंचायत मुख्यालय कोशीवाडा से 2 कीलोमीटर की दुरी पर स्थित है। मौखाडा से 2 किलोमीटर दुर ही एक बडा कस्बा गांवगुडा है। यही से मात्र 35 किलोमीटर दुर विष्व प्रसिद्ध कुम्भलगढ दुर्ग स्थित है जो महाराणा कुम्भा द्धारा बनाया गया था।
गांव में मुख्य गांव सहित छोटी बडि भागले और ढाणियां है। रियासत काल मे यह मेवाड रियासत का ही एक गांव था।

लोगो का ऐसा मानना है की यह गांव एक सुथार मोखा एवं एक आदिवासी द्धारा बसाया गया था। गांव मे भगवान चारभुजा जी का मन्दिर है जो आज भी आस्था एवं विष्वास का बहुत बडा प्र​ितक है। इसके बारे में ऐसा कहा जाता है इस मन्दिर में कीसी काम की स्वीक्​ित के लिए पाती के रुप में आका मांगे जाते है और यहां पर पाती दे देने का अर्थ 100 प्र​ितशत उस काम के पुर्ण होने से लगाया जाता है।
राजस्थन में पंचायती राज्य की स्थापना के साथ यह गांव भी पंचायती राज का हिस्सा बन गया है एव इस राजस्व गांव को ग्राम पंचायत कोषीवाडा मे विलिन कर दिया गया था।
गावं में हिन्दु सम्प्रदाय की बहुलता है एवं कुछ घर मुसलमानो के भी है। हिन्दुओ में मुख्य रुप से राजपुत,सुथार,कुम्हार,नाई,,भील एवं बलाई जा​ित के लोग रहते है जो मुख्य गांव एवं भागलो मे रहते है। गांव का विस्तार निम्नानुसार है-

1- मुख्य गांव मोखाडा
2- डुमेला
3- डोडवा
4- सियावा
5- तलाईयो का भीलवाडा
6- सुथारो की भागल
7- डाग की घाटी
8- आबेला
9- वागरिया बस्ती
10- मुसलमानो की बस्ती

क्ृशि के द्रश्टिकाण से गांव में मुख्यत दो ही फसलो मक्का एव गेहु की पैदावार बहुतायत मे होती है इसके अलावा ग्वार,​ितल्ली,सरसो,मुंग,चमला,तारामीरा आदि अनाजो की पैदावार भी कही कही होती है। मसालो में प्याज एवं लहसुन की भी कही कही पैदावार की जाती है। पशुधन के रुप में मुख्य रुप से गाय,भैस एवं बकरी पाली जाती है इसके साथ साथ खेती के लिए कीसानो द्धारा बैल भी पाले जाते है।
पानी के द्रश्टिकोण से गांव की स्थिती कुछ विषेश अच्छी नही है। प्राय: पीने के पानी एवं सिंचाई का पानी दोनो का ही अभाव है। वर्तमान मे मुख्य गांव को बागेरी नाका परियोजना से जोडने के बाद पीने के पानी की समस्या का कुछ हद तक समाधान हुआ है।
गांव मे षिक्षा के लिए प्राथमिक विद्यालयए,राजीव गांधी पाठशालाए एवं आंगनवाडी है।
गांव की 20 प्र​ितशत जनसंख्या व्यवसाय एवं रोजगार के लिए गांव को छोडकर शहरो मे चली गयी है इसमे में भी राजपुतो में 40 प्र​ितशत लोग बाहर है। बाहर जाने वाले शहर में बोम्बे सबसे बडा नाम है। शेष लोगो में जिविकोपार्जन के लिए क्रशि एवं मजदुरी प्रमुख साधन है।
मनोरंजन के लिए गांव में गवरी,गैर नृत्य,भजन मंडली आदि का आयोजन होता है तथा साथ ही टेलीविजन एवं मोबाइल का उपयोग बहुतायत में होने लगा है।