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Submitted by Surendra Purohit on 2013-06-03 18:00:23
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जातरा में उमडी लोगो की भीड

कोशीवाडा रविवार को आयोजित मेले में लोगो का खुब मेला रहा। मेले में सवेरे 12 बजे तक कुछ खास रोनक नही रही। मेले में आये सभी व्यापारियों ने लगभग 12 बजे तक अपनी अपनी स्टाले सजा ली वैसे व्यापारियों का आना दिन भर लगा रहा। मुख्य चैराये पर सभी तरफ दुकाने सजी हुयी थी और बच्चे एवं महीलाएं अधिक खरिददारी करते नजर आये। मेले में बच्चों एवं बडो के लिए झुले भी लगे थे जिसमें बच्चो ने एवं नवयुवको ने खुब आनन्द उठाया।
सांय 5 बजे खेडा देवी मन्दिर से भोपाजी एवं अन्य मौतबीर मेला स्थल मुख्य चैराये पर आये। उसके बाद आमज माता जी के भोपाजी एवं गमेती लोग चैराये पर एकत्रित हुये और माताजी के धार चढाई। उसके उपरान्त उपस्थित भोपाजी ने तम्बोल की जिसमें एक गमेती श्रृद्धालु के गाल पर माताजी का त्रिशुल घुसाया गया। जिस श्रृद्धालु के तम्बोल कीया उसके साथ सभी अन्य गमेतीयों ने ढोल की थाप के साथ ठाकुरजी लक्ष्मीनारायण जी के मन्दिर के परिक्रमा लगायी। उसके बाद सभी दोबारा मेला स्थल पर एकत्रित हुए एवं त्रिशुल निकाल दिया गया। लोगो का ऐसा मानना है की अगर त्रिशुल से खुन निकल आते है तो आने वाले वर्ष में अकाल नही होगा अन्यथा अकाल पडेगा। लगभग 6 बजे माताजी की चोकी हुयी जिसमें आने वाले वर्ष मे बारिश एवं अनाज के भावो के लिए भविष्यवाणी की गयी। 
सांय 6 बजे का समय मेले का मुख्य समय था उस समय लोगो की काफी भीड थी। मेले में कोशीवाडा के साथ साथ मोखाडा, उसरवास, भैंसाकमेंड, भाणुजा एवं अन्य आस पास के गांवो के लोगो ने भाग लिया। पुरा चैराया लोगो से भरा हुआ था। कही डोलर की आवाज आ रही थी तो कही कुल्फी वाले के भोपु की। इस समय चैराये से दुपहीया वाहन का निकलना भी मुश्कील था। 8 बजे बाद मेला धीरे-धीरे फीका पडने लगा।
मेले में जैन भोजनशाला कोशीवाडा के सोजन्य से 5 रुपये में सब्जी पुडी की व्यवस्था की गयी। एवं गांव के युवाओं द्धारा मेलार्थीयों के लिए पीने के पानी व्यवस्था की गयी जिसमें चैराये के सभी रास्तो के नाको पर पीने के पानी की टंकी भरी गयी।
मेले का रंग सोमवार सवेरे भी 10 बजे तक रहा जिसमें स्थानीय गांव की महिलाओ ने खरिददारी की।