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Submitted by Surendra Purohit on 2013-08-27 12:32:20
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गवरी ने धारण कीये वस्त्र

कोशीवाडा सोमवार को गोरजिया माता मन्दिर में सांय 5 बजे इस वर्ष गवरी के आयोजक हीरालाल प्रतापमलजी द्धारा वस्त्र धारण करवाये। जिसमें दोनो राई माताजी एवं भुडीया के अलावा अन्य गवरी के गमेती शामिल थे। वस्त्र धारण के उपरान्त गवरी ने मादल एवं बैन्ड बाजो सहीत गांव विन्दोली निकाली। यह गांव रिायासत काल में माफिदारी का होने की वजह से गवरी की यह परम्परा रही हैं की माफिदार पुरोहितो के चारो परिवारो बडी हांस, काम्दावत, कानावत एवं बगावतों के यहां गवरी सबसे पहले खेलती हैं उसके बाद चैराये पर खेलना प्रारम्भ करती हैं। गवरी की इस परम्परा को देखने के लिए हीरालाल राठौड जिनको इस बार गवरी की पाती मिली के साथ साथ मुख्य गांव एवं भागलो से कई गा्रमीण उपस्थित थे।
भोपाजी शंकरलाल भील ने बताया की गवरी गांव एवं भागलो में 2-3 दिन घुम कर औगाले निकालेगी उसके उपरान्त खेलना प्रारम्भ करेगी। औगालो निकालना एक परम्परा हैं जिसमें जिन परिवारो में वर्ष भर के दौरान कोई मौत हो गई हो वहां गवरी जाती है तथा थाली मादल एवं गई भर दुख में अपनी सहानुभुति प्रदर्शित करती हैं।