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Submitted by Surendra Purohit on 2013-09-05 16:17:56
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चैराये पर गवरी की धुम

कोशीवाडा गांव के मुख्य चैराये पर इन दिनो गवरी की धुम मची हुयी हैं। दोपहर 2 बजे से ही लोगो का गवरी देखने के लिए एकत्रित होना शुरु हो जाता हैं। और लगभग 4 बजे तक तो अच्छी खासी भीड एकत्रित हो जाती हैं। मेवाड का लोकनृत्य कहा जाने वाला गवरी नृत्य लोगो के मनोरंजन के साधन के साथ साथ विश्वास एवं श्रृद्धा का भी त्यौहार है। रोजगार के लिए गांव से बाहर बाम्बे एवं अन्य शहरो में गये हुए कई लोग गवरी देखने के लिए इन दिनो गांव में आतें हैं।
सवेरे सांय नित्य गौरजिया माताजी के मन्दिर में सेवा होती हैं। प्रातः 9 बजे माताजी की सेवा होने के उपरान्त लगभग 10 बजे गवरी चैराये पर आ, गई भराती हैं उसके उपरान्त सभी खाना खाने के लिए गांव और भागलो में जाते हैं। जिसमें चार-चार पांच-पांच गवरी वाले अलग अलग घरो में जाते हैं। भोजन उपरान्त लगभग 1.30 बजे गवरी खेलना शुरु होती हैं जो सांय 6 बजे तक चलती हैं।