News
Submitted by Surendra Purohit on 2013-10-01 15:12:18
Post News | Show All News

खाना नूतने की परम्परा

कोशीवाडा वर्षो से यह परम्परा रही हैं कि गडावन के दिन सवेरे के शुभमुहुर्त में गौरजीया माताजी की मुर्ति के निर्माण के लिए पांचेला तालाब जाते है एवं मिट्टी का पूजन कर मिट्टी को साथ में लाते हैं इसी परम्परा का आज निर्वाह कीया गया। सुथारो की भागल के निवासीयो की भी बरसो से इस परम्परा में अपनी उपस्थिती दर्ज करवाते हुए गवरी एवं सभी ग्रामीणों को चाय एवं नाश्ता करवाया तथा इस अवसर पर भागल वासीयो का सामुहिक सेवा का कार्य काबिले तारीफ था। रास्ते में मोटी भागल, लुहारो की भागल एवं हनुमानजी की भागल के श्रृद्धालुओं ने भी गवरी एवं गा्रमीणो को अल्पाहार करवाया। बुजर्गो ने यह बताया की जिस तालाब में माताजी का विसर्जन कीया जाता हैं उससे माताजी की मुर्ति के निर्माण के लिये मिट्टी नही लाते हैं इसलिये बरसो से पंाचेला तालाब जाने की परम्परा रही हैं।
पांचेला की मिट्टी ले सभी श्रीमति भंवरीबाई पत्नि स्व. मन्नालाल कुम्हार के घर गये जहां माताजी की मुर्ति के सामने इस मिट्टी का अपर्ण कीया। इसके उपरान्त गवरी ने चैराये पर पहुचं गई भरी। गवरी की सेवा के लिए श्रृद्धालुओ की कतार लगी हुयी हैं। गई भरने के उपरान्त किशनलाल डागलिया एवं उनके परिवार की तरफ से गवरी को अल्पाहार करवाया गया।
आज शाम को गवरी के भोजन की व्यवस्था गवरी के आयोजक हीरालाल राठौड द्धारा की जायेगी। गडावन एवं वलावन दोनो ही दिन गवरी के भोजन की व्यवस्था आयोजक की रहती हैं। आज मौसम के साथ देने की वजह से गवरी को देखने के लिए लोगो की खासा भीड एकत्रित हुयी है।