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Submitted by Surendra Purohit on 2013-10-02 14:09:50
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गौरजीया माताजी विसर्जन आज

कोशीवाडा सवा महीने से चल रहे गवरी के इस पावन पर्व का आज माताजी के विसर्जन के साथ समापन हो जायेगा। लगभग 3.15 बजे से 4.15 बजे के मध्य उपयुक्त समय पर माताजी को विसर्जन के लिए नागेला तालाब ले जाया जायेगा।
गवरी के गडावन पर कल बारिश ने लगभग आधे घन्टे की तेज बारिश ने बाधा पहुचायी थी परन्तु उसके बाद मौसम साफ हो गया था। बारीश इतनी जबरदस्त और अचानक आयी की तकरीबन 30-40 लोगो के जुते चप्पल बह कर चले गये। चैराये पर दर्शको की भारी भीड थी जहां देखो वहां गवरी देखने वाले लोग बैठे हुए थे कही घरो, खिडकीयो, छतो, पेडो पर सभी जगह दर्शको से खचाखच भरी हुयी थी।
गडावन में एक के बाद एक सारे खेल निकाले गये तथा अन्त में हाथी की सवारी निकाली गयी। यहां से गवरी एवं गा्रमीण गौरजीया माता को लेने कुम्हार के घर गये। श्रृद्धा एवं जयकारो के साथ सभी माताजी को लेकर मन्दिर गये जहां माताजी की सेवा आरती की। सेवा उपरान्त गवरी, गमेती समाज के सभी मेहमानो एवं गा्रमीणो को जैन समाज की हवेली में गवरी के आयोजक हीरालाल राठौड द्धारा भोजन करवाया गया।
 
गवरी के रात के समारोह में भी पाबुजी माराज, रिछ और अन्य कुछ खेल निकाले गये उसके बाद जामटा गाया गया जिसमें श्रृष्टि एवं गवरी की उत्पति की कहानी बतायी गयी थी। रात को भी चैराया खचाखच भरा हुआ था। रात की गवरी सवेरे 6 बजे तक चली जिसमें सभी गवरी के लोग जोगी बन गये।
आज प्रातः 9 बजे माताजी की आरती की गयी उसके उपरान्त लगभग 10 बजे गौरजीया माताजी को जयकारो एवं श्रृद्धा के साथ गांव के चैराये पर लाया गया। इसके उपरान्त गई भरी गयी। आयोजक हीरालाल राठौड ने गवरी को सवेरे का भोजन भी करवाया। अब 3-4 खेल निकाले जायेगें उसके उपरान्त पेरावणी की जायेगी तथा माताजी को विसर्जन के लिए ले जाया जायेगा।