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Submitted by Surendra Purohit on 2013-10-03 17:44:46
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जयकारो के साथ गवरी विसर्जन

कोशीवाडा सवा महीने से चल रही गवरी का बुधवार शाम को गौरजीया माताजी के विसर्जन के साथ समापन हुआ। प्रातः 10 बजे माताजी को चैराये पर लाया गया उसके उपरान्त गवरी ने कुछ खेल निकाले। दोपहर में लगभग 3.30 बजे माताजी को विसर्जन के लिए ले जाया गया। माताजी के विसर्जन में श्रृद्धा का सैलाब उमड पडा हजारो श्रृद्धालु विसर्जन की यात्रा में शामिल हुए। थाली मादल एवं बैन्ड बाजो की धुन पर युवाओ ने नाचने का खुब आनन्द उठाया। रास्ते में जगह जगह महीलाओं ने माताजी के दर्शन कीये। माताजी के भाव में तीसरे साल दोबारा मेहमान बनने की बात कही।
बलाइयों की गवाडी से थोडा आगे गवरी ने अपने कपडे उतारे। उसके उपरान्त बडी स्कुल के गेट से होते हुए नागेला तालाब पर जा माताजी को विसर्जित कीया। विसर्जन पर एक अनुठी परम्परा होती है जिसमें गमेती समाज के युवा तालाब के वहां से दौड लगाते है तथा जो युवा सबसे पहले मन्दिर पहुचता हैं उसे नारियल एवं अन्य पुरस्कार मिलता हैं।
विसर्जन के उपरान्त गवरी एवं अन्य गा्रमीण पाती वन्दाने के लिए मन्दिर गये जहां सभी समाज के लोगो ने एक दुसरे को दी जिसमें आपसी भाईचारा एवं सोहार्द प्रकट हो रहा था।