News
Submitted by Surendra Purohit on 2014-01-03 13:28:29
Post News | Show All News

हमारी राते कुछ एसे गुजरती है............

कोशीवाडा उईहो...... अरे रोजडा आईगिया है...... हो................. खेतो से सुनसान रातो में इस तरह की आवाजे सुनाई पडती हैं तो पता लगता है कि धरती पुत्र कहे जाने वाले कीसान इतनी कडाके की सर्दी में अपने फसलो की रखवाली कर रहे है।  रात्रिकालीन कडाके की सर्दी में जहां हम आराम से अपने घर पर रजाई कम्बल में आराम से नींद निकालते वही ये धरती पुत्र कहे जाने वाले हमारे भाई खेतो पर अपनी फसलो की रखवाली कर रहे होते हैं। इन दिनो रात का तापमान 4 डि.से. और 5 डि. से. हैं परन्तु इनको तो रखवाली के लिए जाना ही हैं। ज्योही दिन अस्त होकर अन्धेरा छाने लगता हैं खेतो से कीसानो की आवाजे आना शुरु आ जाती हैं। 
इतनी कडाके की सर्दी और उपर से फसलो की रखवाली की चिन्ता। कीसान प्यारेलाल कुम्हार बताते है कि रात को नींद नही निकाल सकते, रात भर लकडी जला कर रखते है नही तो सर्दी इतनी तेज होती हैं कि रुकना मुश्किल हो जाता है। रात को खेत पर ही एक दो बार चाय बना लेते हैं ताकी नींद नही आये। रोजडो के आने का समय निर्धारित नही है कभी ये 8 बजे ही आ जाते है तो कभी 12-1 बजे। 
धन्य है ये धरती पुत्र जो हमारे लिए इतनी मेहनत करते हैं। प्यारेलाल के साथ ही 10 वीं कक्षा का छात्र अमृत प्रजापत भी रात में खेतो पर फसलो की रखवाली करता हैं। दिन में विद्यालय जाना फिर पढाई करना एवं रात पर खेतो की रखवाली करना ये हैं हमारे असली हीरो। अमृत बताता हैं कि कभी कभी तो रोजडे इतने परेशान करते हैं कि पटाखे फोडने पडते हैं। पटाखो की आवाज से रोजडे दुर भाग जाते।
यह स्थिती गांव तथा आस पास के उन सभी कृषको की हैं जिन्होने रबी फसलो की बुवाई कर रखी हैं। नील गाये जिनको देशी भाषा में रोजडे कहते है, इनसे कीसान इतने परेशान हैं कि कीतने ही कृषको ने तो खेती करना ही छोड दीया हैं। क्योकि कीसान बेचारा रात दिन अपने खेतो में मेहनत करता हैं और एक ही दिन में यह सारी फसलो को चैपट कर देता हैं। सरकार या प्रशासन को कीसानो की इस ज्वलन्त समस्या पर विचार करने की जरुरत हैं।