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Submitted by Surendra Purohit on 2014-03-18 11:15:02
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घाटो छोडो रे कन्हैया..........

कोशीवाडा होलिका दहन से पूर्व रात्रि 9 बजे ढोल की चाप के साथ गैर नृत्य शुरु हुआ जिसमें युवाओं के साथ साथ बुजुर्गो ने भी उत्साह दिखाया। गैर नृत्य के पांच राउन्ड हुए जिसमें प्रत्येक राउन्ड के बाद होली के फाग गाये। युवाओ ने जोश के साथ हां रे गणपति............, घाटो छोडो रे कन्हैया..........., रंग राठौडा राज ........... जैसे होली के फाग गाते हुए नाचने का खुब आनन्द उठाया। रात्रि लगभग 12 बजे होलिका दहन कीया गया।
दहन के दुसरे दिन 8 बजे से ही रंगो का पर्व धुलन्डी शुरु हो गया जिसमें सबसे पहले छोटे बच्चो ने धुलन्डी खेलना शुरु कीया। फिर धीरे धीरे नवयुवक आने लगे तथा एक दुसरे पर रंग डालने की शुरुवात की। हर वर्ष धुलन्डी खेलने वालो की टोली गांव के चारो ओर चक्कर लगाती हैं पर इस बार ऐसा कुछ नही हुआ गांव के चैराये पर ही धुलन्डी खेली गईं। रंगो से सरोबार युवा फिल्मी व राजस्थानी गानो पर नाचने का जमकर आनन्द उठाया।