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Submitted by Surendra Purohit on 2014-06-13 17:24:52
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शालीन व्यवहार श्रेयस्कारी होता हैं- साध्वी विद्यावती द्धितीय

कोशीवाडा आचार्य श्री महाश्रमणजी की शिष्या साध्वी श्री विद्यावतीजी द्धितीय ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि इन्सान को अपना व्यवहार शालीन रखना चाहीए। इन्सान की पहचान व्यवहार से होती हैं। धन दौलत रंग रुप इनसे भी बढकर श्रेयस्कारी आचरण होता है। व्यक्ति के शालीन व्यवहार में आकर्षक शक्ति होती हैं। अपने सदव्यवहार से दुश्मन को भी मित्र बनाया जा सकता है। साध्वी ने कषाय उपशमन की भावना पर भी जोर दिया। साध्वी श्री प्रेरणाश्रीजी ने गीत प्रस्तुत कीया।
साध्वी श्री ऋद्धियशाजी ने रात्रिकालीन प्रवचन के दौरान कहा कि व्यक्ति की अगर नीयत साफ होती है तो उसका आखीरकार भला ही होता है। मन सरल एवं विचार पवित्र होने चाहीये। मन चंगा तो कसौटी में गंगा इन भावो को कथानक के माध्यम से समझाया।
तेरापंथ जैन समाज के शंकरलाल राठौड ने बताया कि साध्वीजी 15 जुन को गांवगुडा तथा वहां से झालो की मदार के लिए प्रस्थान करेगी। इस अवसर पर सोहनलाल गुलाबचन्द राठौड, सुन्दरलाल डागलिया, मदनलाल, टिकमचन्द, दिपेश तथा अन्य कई श्रृद्धालु उपस्थित थे।