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Submitted by Surendra Purohit on 2014-06-29 18:41:28
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कसाय त्याग से मोक्ष - आचार्य रविशेखर सुरिश्वर

कोशीवाडा जैन श्वेताम्बर हीमाचल सुरी सम्प्रदाय के आचार्य रविशेखर सुरिश्वर ने अपने व्याख्यान में बताया कि आत्मा का संसार में भटकने के लिए चार प्रमुख कयास को्रध, अभिमान, माया और लोभ उत्तरदायी हैं। का्रेध प्रेम का नाश करता हैं, अभिमान विनय का नाश करता हैं, माया से मित्रता का विनाश हो जाता हैं तथा लोभ सर्वनाश के लिए उत्तरदायी हैं। आचार्य ने इन चारो कसायो का मानवीय शरिर में स्थान बताते हुए कहा कि का्रेध कपाल में, अभिमान गर्दन में, माया हा्रदय में तथा लोभ शरिर के रोम रोम में बसता हैं। इन चारो का त्याग करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती हैं।
संत ललितशेखर ने धार्मिक प्रवचन के माध्यम से श्रावक श्राविकाओं को आध्यात्मिक जीवन का महत्व समझाया। आचार्य ने गांव के मुख्य चैराये पर नवनिर्माधाधिन मुनिसुव्रत स्वामी के मन्दिर का अवलोकन भी कीया। इस अवसर पर राठौड कुन्दनमल, सुन्दरलाल, शंकरलाल, मिठालाल, जसराज, टीकमचन्द, प्यारचन्द चपलोत एवं अन्य श्रावक उपस्थित थे।