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Submitted by Surendra Purohit on 2013-03-24 16:10:31
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मुख्य गांव के चैराये पर गैर नृत्य एवं होली के गीतो की धुम

कोशीवाडा मुख्य गांव के चैराये पर इन दिनो अष्टमी से ही गैर नृत्य की बडी धुम मची हुयी है। साय 8.30 बजे जैसे ही ढोल की आवाज आनी शुरु होती है और नवयुवको का चैराये पर एकत्रित होना शुरु हो जाता है। नवयुवको के साथ साथ बुजुर्गो में भी काफी उत्साह होता है जिनमें मुख्य रुप से जेलु भाई दर्जी और भंवर भाई नाई विशेष उत्साह से भाग लेते है। रोजाना नवयुवको द्धारा 4-5 पारी गैर नृत्य की खेली जाती है तथा ढोल की चाप पर फाग गाये जाते हैं।
हालाकी कोशीवाडा के गैर नृत्य की वो बात नही रही जैसी पहले थी । पुराने लोग बताते है की गैर खेलने के लिए गांव और भागलो के इतने लोग इकट्ठे होते थे की गई चबुतरे के चारो तरफ भरी जाती थी और लोग सज धज के पारम्परिक वेशभुषा में चैराये पर आते थे। फिर भी नवयुवको एवं कुछ बुजुर्ग लोग इस अच्छी परम्परा को अपने प्रयासो से जिवित रख रहे है।